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सà¥à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨à¤² मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° à¤à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤«à¥€ à¤à¤• गंà¤à¥€à¤° बीमारी है जो सबसे अधिक शिशà¥à¤“ं और छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती जिसे à¤à¤¸à¤à¤®à¤ नाम से à¤à¥€ जानते हैं. à¤à¤¸à¤à¤®à¤ के शिकार बचà¥à¤šà¥‡ अपनी मांसपेशियों का उपयोग सही पà¥à¤°à¤•ार से नहीं कर पाते हैं, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह बीमारी उनकी रीड़ की हडà¥à¤¡à¥€ में नरà¥à¤µ सेलà¥à¤¸ को खराब कर देती है. जो बचà¥à¤šà¥‡ सà¥à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨à¤² मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° à¤à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤«à¥€ टाइप-1 से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ होते हैं, उनकी मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं. शरीर में पानी की कमी होने लगती है और सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने में और सांस लेने में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दिकà¥à¤•त होती है. इस बीमारी से पीड़ित बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की मांसपेशियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि वो हिलने-डà¥à¤²à¤¨à¥‡ लायक à¤à¥€ नहीं रहते हैं. सà¥à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨à¤² मसà¥à¤•à¥à¤²à¤° à¤à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤«à¥€ बीमारी के कारण बचà¥à¤šà¥‡ धीरे-धीरे इतने अकà¥à¤·à¤® हो जाते हैं कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सांस तक लेने के लिठवेंटिलेटर की जरूरत पड़ जाती है.
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